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    परिचय

    परिचय

    प्रकाशन विभाग, सिविल लाइन्स (विधान सभा मेट्रो स्टेशन के पीछे), दिल्ली-110054 में स्थित आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय का अधीनस्थ विभाग है। इस विभाग की अध्यक्षता नियंत्रक प्रकाशन द्वारा की जाती है, जिनके सहयोग के लिए सहायक नियंत्रक (प्रशासन), सहायक नियंत्रक (वाणिज्य) तथा वित्तीय अधिकारी नियुक्त हैं।

    प्रकाशन विभाग का संक्षिप्त इतिहास: –

    केन्द्रीय प्रकाशन शाखा (वर्तमान में प्रकाशन विभाग) की स्थापना दिनांक 01-04-1924 को कलकत्ता में हुई थी, जिसके साथ एक खुदरा / फुटकर दुकान संलग्न थी। इससे पहले इस कार्य को भारत सरकार मुद्रणालय, कलकत्ता के एक अनुभाग द्वारा किया जाता था जो कि प्रकाशन अनुभाग के नाम से जाना जाता था। केन्द्रीय प्रकाशन शाखा ने वर्ष 1928-29 से वर्ष 1930-31 तक एक वाणिज्यिक संगठन के रूप में कार्य किया । वर्ष 1932 में, शाखा को (पुस्तक दुकान को छोड़कर जो कि बाद में बुक डिपो कहलाया) दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्ष 1933 में केन्द्रीय प्रकाशन शाखा के प्रबंधक के पद को “प्रबंधक प्रकाशन” के नाम से पुनर्नामित किया गया। कार्य, खदान और बिजली मंत्रालय, नई दिल्ली के (दिनांक 10-03-1948 के सी ऍफ़ ओ एम्- 90/20/47-जी) की दिनांक 11-02-1948 की अधिसूचना सं. ए-48 के तहत वर्ष 1948 में शाखा को भारत सरकार प्रकाशन शाखा के रूप में पुनर्नामित कर दिया गया। दि. 9 जुलाई, 1948 को किताब महल (प्रकाशन एम्पोरियम)- प्रकाशन शाखा की खुदरा दुकान का उदघाटन तत्कालीन माननीय कार्य, खदान और बिजली मंत्री श्री एन. वी. गाडगिल जी द्वारा किया गया । वर्तमान में किताब महल, स्टेट एम्पोरिया बिल्डिंग. यूनिट सं. 21, बाबा खडग सिंह मार्ग, नई दिल्ली में स्थित है। फरवरी, 1973 के अंत तक प्रकाशन शाखा ने तत्कालीन मुख्य नियंत्रक, मुद्रण और लेखन सामग्री के अधीनस्थ कार्यालय के रूप में कार्य किया। दि. 01-03- 1973 को मुद्रण और लेखन सामग्री विभाग को (भारत का राजपत्र के भाग -1, खंड में प्रकाशित) भारत सरकार, आवास और निर्माण मंत्रालय, नई दिल्ली के दि. 05-02-1973 के संकल्प सं. 1-11012 /3/73/पीआई के तहत तीन पृथक विभागों में बाँट दिया गया जोकि मुद्रण निदेशालय, लेखन सामग्री विभाग तथा प्रकाशन विभाग के रूप में नामित हुए। तत्पश्चात आवास और निर्माण मंत्रालय (वर्तमान में शहरी विकास मंत्रालय / आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय) के तहत प्रकाशन विभाग एक पूर्ण विभाग के रूप में अस्तित्व में आया जिसके मुखिया नियंत्रक प्रकाशन (स्तर ‘अ ‘) हैं। आवास और निर्माण कार्य मंत्रालय के दि. 06-01-1973 के पत्र सं. 1-11012/3/72-पीआई (ii) के तहत प्रबंधक, प्रकाशन विभाग के पद समाप्त कर दिया गया तथा इस विभाग के लिए नियंत्रक प्रकाशन, उप नियंत्रक प्रकाशन तथा वित्तीय अधिकारी (स्तर ‘बी’) के पद सृजित किये गए।

    विभाग का संगठन: –

    प्रकाशन विभाग, भारत सरकार, शहरी विकास मंत्रालय / आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली का एक स्वतंत्र अधीनस्थ संगठन है। यह भारत सरकार, उद्योग एवं श्रम विभाग के दि. 10-11-1930 के ओ एम् सं. ए-436 के लेखा कोड भाग। के तहत परिभाषित एक सेवा विभाग है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के प्रशासनिक सुधार स्कंध द्वारा इस विभाग की कार्यप्रणाली की गहन जाँच सन 1971 से की गयी तथा जनवरी 1978 में भारत सरकार को सौंपी गयी IXth और अंतिम रिपोर्ट की संस्तुतियां जोकि विभाग के कर्मचारियों की भरती, चयन और विकास की प्रक्रिया से सम्बंधित है, दी गयी। इस विभाग के पुनर्गठन से सम्बंधित रिपोर्ट का पैरा 99.2 पुनः प्रस्तुत हैः-

    99.2: विभाग का परिशोधित संगठनात्मक ढांचा तथा कर्मचारियों की भरती, चयन और विकास की प्रक्रिया से सम्बंधित सुझाव उत्तरवर्ती पैराग्राफ में दिए गए हैं। संक्षेप में, प्रकाशन विभाग को दो शाखाओं में विभाजित किया जाएगा जोकि प्रशासनिक प्रभाग और विपणन प्रभाग होंगे। इनमें से प्रत्येक प्रभाग की अध्यक्षता उप नियंत्रक द्वारा की जाएगी। हर प्रभाग को तीन शाखाओं में विभाजित किया जाता है। तदनुसार, प्रशासनिक प्रभाग में (क) प्रशासनिक शाखा, (ख) विपणन शाखा और (ग) वित्तीय शाखा समाहित होंगी। विपणन प्रभाग में (क) पत्रिकाएँ शाखा, (ख) बिक्री शाखा और (ग) भंडार शाखा होंगी।

    वर्ष 1973 में विभाग को तीन स्वतंत्र विभागों में विभाजित कर दिया गया जोकि मुद्रण निदेशालय, लेखन सामग्री विभाग और प्रकाशन विभाग के रूप में जाने गए। तत्पश्चात, प्रकाशन विभाग एक पूर्णरूपेण विभाग के रूप में अस्तित्व में आया। स्वतंत्रता से पूर्व इस विभाग का कार्य केवल सरकारी रिपोर्टों तक सीमित था। समय गुजरने के साथ, इसका कार्यक्षेत्र बढ़ा तथा यह भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। यह विभाग भारत सरकार के विभिन्न प्रकाशनों, पत्रिकाओं और राजपत्र के प्रकाशन, बिक्री, भण्डारण तथा वितरण के लिए प्राधिकृत प्रकाशक है।

    प्रकाशन विभाग, भारत सरकार के प्रकाशनों जैसेकि राजपत्र, रिपोर्ट, अधिनियमों तथा पुस्तकों का प्रकाशन करता है जिनकी अपनी योग्यता और महत्वता है। विभाग द्वारा गहन अध्ययन, विचार-विमर्श और अथक प्रयासों के बाद तैयार और प्रकाशित सामग्री की विषय वस्तु को विद्वानों, शिक्षाविदों, राजनेताओं, वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों, व्यापारियों आदि सहित विभिन्न हितधारकों के लिए अधिक प्रामाणिक, मूल्यवान और उपयोगी बनाने के लिए तैयार किया जाता है। सरकारी प्रकाशनों के प्रदर्शन और बिक्री का उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों तथा नीतियों आदि का प्रसार करना है ताकि आम आदमी इन प्रकाशनों से लाभान्वित हो सके।

    वर्तमान कार्य प्रणाली का संक्षिप्त विवरण: –

    1. भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/ विभागों के द्वारा प्रकाशित सरकारी प्रकाशनों तथा पत्रिकाओं का भंडारण, बिक्री तथा वितरण करवाना
    2. भारत का राजपत्र तथा दिल्ली राजपत्र के विभिन्न भागों / खण्डों का प्रकाशन करवाना।
    3. नाम परिवर्तन, धर्म परिवर्तन, पब्लिक नोटिस, दत्तक प्रक्रिया, खोया/ नष्ट हुआ/ चोरी आदि से सम्बंधित विज्ञापन भारत के राजपत्र में छपवाना |
    4. विभिन्न क़ानूनी मामलों में मदद के लिए भारत के राजपत्र की साक्षयांकित प्रतियाँ उपलब्ध करवाना।
    5. प्रति माह www.deptpub.nic.in जोकि प्रकाशन विभाग की वेबसाईट है पर नई पुस्तकों तथा पत्रिकाओं कि सूची अपलोड करना |
    6. पुस्तकों की बिक्री विभागीय बिक्री पटलों द्वारा की जाती है जोकि नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा बेंगलुरु में स्थित हैं।
    7. पुस्तकों तथा पत्रिकाओं की बिक्री के लिए प्रतिबंधित / नियमित प्रतिनिधियों को नामांकित करना |
    8. प्रकाशनों और पत्रिकाओं के सूचीपत्र तैयार करना तथा प्रतीक संख्या (symbol number) जारी करना |
    9. बिक्री की कार्यवाही में बढोतरी के लिए देश भर में होने वाले पुस्तक मेलों में प्रतिभागिता करना |
    10. आर्मी प्रकाशनों का भंडारण एवं वितरण करना |
    11. वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, भारत सरकार के उपक्रमों, सांविधिक निकायों और आम नागरिकों के विज्ञापनों को भारत के राजपत्र में प्रकाशित करवाना |

    प्रकाशन विभाग की भावी योजनाएं: –

    1. नाम परिवर्तन, धर्म परिवर्तन, पब्लिक नोटिस, लिंग परिवर्तन आदि से संबंधित कार्यवाही में ऑनलाइन सुविधायें उपलब्ध करवाना |
    2. बिलिंग, माल सूची, प्रकाशनों / पत्रिकाओं की बिक्री आदि को कम्प्यूटरीकृत करवाना | विभाग के प्रकाशनों / पत्रिकाओं को किराये पर पाठकों और उपभोक्ताओं को ऑनलाइन उपलब्ध करवाना |
    3. विभाग के बिक्री पटलों को पी पी पी मोड (किराया / कमीशन आधार पर) पर विकसित करना |
    4. अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे ई-बाज़ारों पर ऑनलाइन बिक्री के लिए आवश्यक कार्यवाही को आरम्भ करना | वेबसाईट पर उपभोक्ताओं के लिए प्रकाशनों / पुस्तकों / पत्रिकाओं को ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध करवाना।
    5. डिजिटल इंडिया मिशन (Digital India Mission) के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विधिक सलाहकार, व्यवसाय विकास प्रभंधक, सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधक और सञ्चालन सलाहकार की नियुक्ति करना |